मजदूर पर एक कविता


यही मजदूर है जो श्रम करता रहता है,


खून पसीना बहा कर परिवार का पोषण करता रहता है,


क्यों ना लाचारी मे करना पड़े मजदूरी परन्तु करता रहता है,


धूप और ठंड का सामना करते हुए यह मेहनत करता रहता है


सोचता है न यह काम करना पड़े उनके बच्चों को कभी,
 


खून पसीना बहा कर पढ़ाता है उन्हे अभी,


फल भले ही मेहनत या पढ़ाई का हो परन्तु लाभदायक है पढ़ाई अभी,


जिंदगी ना गुजारनी पड़े उनके बच्चों को ऐसे कभी,


यह सोंच कर वह मेहनत करता है अभी।    

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