शिकायत: इस स्मार्ट जेनेरेशन से……

दोस्तों आज मैं बात करने जा रहा हूँ एक छोटे से विषय “शिकायत” के बारे में। आप यह सोंच रहे होंगे की आखिर आज मैं इस बारे मे क्यूँ बात करने जा रहा हूँ? क्या मेरी किसी से लड़ाई हो गयी या फिर मेरे मुताबिक कोई कार्य पूरा नहीं हुआ और मैं आप से शिकायत करने के लिए उत्सुक हूँ। जी ऐसा बिलकुल भी नहीं है।

आखिर क्यों करनी पड़ती है हमे यह शिकायत? क्या हममे सहनशीलता की कमी हो गई है या फिर इस बदलते समय के साथ हम अपने आप को बदल नहीं पा रहे हैं? जिस तरह से लोगों के व्यक्तिगत विचार, बात-चीत करने का ढंग अलग होता है उसी तरह से हर इंसान की शिकायते भी अलग अलग प्रकार की होती हैं। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक इंसान की शिकायतों का प्रकार भी बदलता रेहता है। आपको याद होगा बचपन मे हम बिना किसी शिकायत के खुश रहते थे जब हमारे पास एक मोबाइल हुआ करता था जिसमे कोई भी बटन दबाओ लेकिन गाना एक ही बजता था लेकिन आज की इस स्मार्ट जेनेरेशन मे स्मार्ट फोन होने के बाद भी हम शिकायतों मे उलझे रहते हैं।

पहले के समय हमारे अंदर सहनशीलता हुआ करती थी क्योंकि शिकायत करने के लिए संचार के ज्यादा माध्यम नहीं होते थे लेकिन आज के समय मे यदि किसी से शिकायत या नाराजगी होती है तो हम अपने व्हाट्सऐप्प और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया ऐप मे गिले शिकवे अपडेट कर हलचल मचा देते हैं।

मेरी शिकायत हैं इस बदलते दौर से, इस स्मार्ट जेनेरेशन से……

अगर हम स्मार्ट फोन की बात करें तो हर किसी के हाथ मे स्मार्ट फोन देखा जा सकता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की एक उंगली के इशारों पे नाचते हैं ऐप्स। एक पुरानी कहावत है जैसा नाम वैसा काम लेकिन यहाँ पर हम समझ नहीं पाते की यह जो सोश्ल मीडिया ऐप्स हमे सामाजिक रूप से अपनो से पास नहीं बल्कि दूर लेता जा रहा है। कहाँ पहले तो जन्मदिन एक बहाना हुआ करता था जिसमे हम अपने करीबियों को फोन करके बात चीत कर लिया करते थे लेकिन आज व्हाट्सऐप्प और फेसबुक वाल पोस्ट करके बधाई देते है।

बेंजामिन फ्रैंकलिन ने एक बात कही थी ‘जल्दी सोना और जल्दी उठना इंसान को स्वस्थ, समृद्ध और बुद्धिमान बनाता है’ लेकिन आज की स्मार्ट टेक्नालजी हमे रातों मे सोने नहीं देती। पहले के समय मे कहा जाता था कि सूर्योदय से पूर्व उठना अच्छा होता है लेकिन आज कल तो लोग सूर्य उदय से थोड़ा पहले सोने जाते हैं।


मैं यदि अपनी शिकायत शिक्षा के  छेत्र  मे करूँ तो पहले के समय मे ब्लैक बोर्ड मे शिक्षक लिखते थे और छात्र उसे अपने पेन-पेंसिल से काँपी मे उतारते थे लेकिन आज स्मार्ट क्लासेस (प्रोजेक्टर से पड़ाई) ने इसका रूप बादल दिया है। अच्छी हैंडराइटिंग न बनना, प्राथमिक कक्षा मे चश्मा लगना, रीड की हड्डी मे दर्द जैसी अन्य शारीरिक समस्याएँ भी होती हैं।

शिकायतें तो बहुत हैं दोस्तों लेकिन यदि हर एक छोटी- छोटी चीजों पर गौर करेंगे तो जीवन जीना कठिन हो जाएगा। अंत मे मैं आप सभी से यही कहना चाहूँगा कि टेक्नालजी और स्मार्ट जेनेरेशन का हमे सही उपयोग करना चाहिए नाही की वह हमारा करे।

समय बहुत बहुमूल्य हैं, हमे इसका सम्मान करना चाहिए।


Comments

  1. True.....
    And rabinshu tumne b mujhe msg kr k hi birthday wish kiya ta....:)

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  2. धन्यवाद कुसुमजी मैं यही कहूँगा की यह सब समय की माया है ......

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  3. Sahi kaha rabinshu aj kal to FB watsapp trend ho aya hai sikwe shiqayat Ke liye....

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  4. जूहीजी विडम्बना तो यह है कि लोग FB में गिलेशिकवे को भी LIKE करते हैं।

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  5. रबींशु........... माया महा ठगिनी , हम जानी । सोशल साइट्स यही हैं ।

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